फिल्म Review- मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झाँसी

0
309
review-of-manikarnika-queen-of-jhansi-bc-medi
review-of-manikarnika-queen-of-jhansi-bc-medi

‘खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी’ सुभद्रा कुमारी चौहान की इन लाइन्स ने लक्ष्मीबाई को इतिहास के पन्नों में और लोगो के ज़ेहन में अमर कर दिया था. इस फिल्म को लोगो के रगों में जिंदा रखने के लिए कंगना रनौत ने भी खूब मेहनत करी है कई विवादों के बाद ये फिल्म रिपब्लिक डे के मौके पर रिलीज हुई है.

Image result for manikarnika

कहानी       
फिल्म की शुरुआत अमिताभ बच्चन की दमदार अवाज से होती है.पेशवा (सुरेश ओबेरॉय) की दत्तक बेटी मणिकर्णिका उर्फ मनु जन्म से ही साहसी और सुंदर हैं. बचपन से ही उनको शास्त्रज्ञान भी है ऐसे में राजगुरु (लभूषण खरबंदा) की निगाह उन पर पड़ती है. मनु के साहस और शौर्य से प्रभावित होकर वह झांसी के राजा गंगाधर राव नावलकर (जीशू सेनगुप्ता ) से उसकी शादी करते हैं और मणिकर्णिका झाँसी की रानी बन जाती है.

झाँसी की रानी अंग्रेजो की गुलामी करने के सख्त खिलाफ थी. वह झांसी को वारिस देने पर खुश है कि अब उसके अधिकार को अंग्रेज बुरी नियत से हड़प नहीं पाएंगे. मगर घर का ही भेदी सदाशिव (मोहम्मद जीशान अयूब) षड्यंत्र रचकर पहले लक्ष्मीबाई की गोद उजाड़ता है और फिर अंग्रेजों के जरिए गद्दी छीन लेता है.

Related image

एक्टिंग
अगर  फिल्म में एक्टिंग की बात की जाये तो सबसे पहले कंगना की बात करते है उन्होंने अपने रोल को इतना बखूबी निभाया है मानो यह रोल उनके लिए ही बना था. झलकारी बाई के रोल में अंकिता लोखांडे को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं दिया गया है लेकिन जितना भी उनका रोल था उन्होंने भी सबका दिल जीत लिया है. पहली फिल्म में वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब रही हैं.

डैनी जो की बॉलीवुड के टॉप क्लास विलन माने जाते थे गुलाम गौस खान के रोल में उनकी परफॉर्मेंस ये साबित करती है कि उनमें पहले जैसी धार अभी भी कायम है. वहीं, गंगाधर राव के रोल में जीशूसेन गुप्ता, पेशवा के रोल में सुरेश ओबरॉय और राजगुरु के रोल में कुलभूषण खरबंदा ने अपना रोल बखूबी निभाया है.

Image result for manikarnika

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत की तरह मणिकर्णिका  वॉर ड्रामा नहीं है। लेकिन, फिल्म का बेस्ट पार्ट इसका एक्शन सीन है जो कि कंगना रनौत और अंकिता लोखंडे करने में सफल रही. दोनों को पर्दे पर तलवारबाजी करते हुए देखना रोमांचक है. फिल्म का बैग्राउंड म्यूजिक और साउंड 1857 की क्रांति जैसा ही जोश भर देगा .अब बात करें डायरेक्शन की.फिल्म को मुख्य रूप से कंगना ने डायरेक्ट किया है और उनके अलावा राधा कृष्ण और  जगरलामुदी भी डायरेक्शन में शामिल है. कई विवादों को झेलते हुए कंगना इस फिल्म को रिलीज़ करने और लोगो की बीच लाने में सफल रही. ये डायरेक्शन का ही कमाल है कि फिल्म के आखिरी 40 मिनट आपके रौंगटे खड़े कर देंगे.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here