‘हनुमान’ बने चुनाव आयोग को ‘जामवंत’ बन सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाई उसकी शक्तियां !

0
104
Supreme Court slam to election commission
रामायण में एक प्रसंग है कि जब भगवान राम अपनी पूरी सेना के साथ इस सोच में गुम थे कि समुद्र पार, लंका में सीता को खोजने कौन जाएगा? सभी एक सुर में हनुमान का नाम लेते हैं। लेकिन हुनमान इस बात से आशंकित थे, कि क्या उनमें इतनी ताकत है कि वे समुद्र पार कर पाएंगे? क्या वे सीता को खोज पाएंगे और तभी जामवंत हनुमान को उनकी वो शक्तियां याद दिलाते हैं जो उनमें पहले से ही थीं। दरअसल हनुमान में ताकत थी लेकिन उन्हें खुद पर विश्वास कम था। रामायण का ये प्रसंग मौजूदा राजनैतिक हालातों पर सटीक बैठता है। जहां हनुमान की भूमिका में है चुनाव आयोग जो अपनी शक्ति भूल चुका था, अपना आत्मविश्वास खो चुका था और जामवंत की भूमिका में है सुप्रीम कोर्ट, जिसने चुनाव आयोग को उसकी शक्तियां याद दिलाई हैं, और तबसे ही चुनाव आयोग एक के बाद एक अविश्वसनीय फैसले ले रहा है और सभी चौंक रहे हैं। चौंक इसलीए रहे हैं। क्योंकि किसी को ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि ये वही चुनाव आयोग है, जो अब तक सिर्फ नसीहतें देने का काम कर रहा था और अब धड़ाधड़ा बैन लगा रहा है। और शायद यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग की इस कार्रवाई पर संतुष्टि जताई है।
supremecourt
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि लगता है, चुनाव आयोग को उनकी शक्तियां वापस मिल गई हैं। ऐसी स्थिति में कोर्ट को किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है। इसलिए आज हम कोई आदेश पारित नहीं करेंगे। इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई ने जब नेताओं के धार्मिक और विवादित बयान पर आयोग से कार्रवाई के बारे में पूछा था तो आयोग ने कहा था कि हम ऐसे मामलों में सिर्फ नोटिस भेजकर जवाब मांग सकते हैं इस पर बेंच नाराज हो गई और आयोग से ही पूछा कि वास्तव में आप यह कहना चाह रहे हैं कि आप शक्तिहीन हैं।
election-commission
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख का नतीजा ये हुआ कि चुनाव आयोग ने सोमवार को सबसे पहले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा सुप्रीमो मायावती पर 48 और 72 घंटे तक चुनाव प्रचार करने की रोक लगा दी और रोक भी ऐसी कि ये नेता रैली तो दूर प्रचार का एक ट्वीट भी नहीं कर सकते हैं और शाम होते-होते आयोग ने बीजेपी नेता मेनका गांधी और सपा नेता आजम खान पर भी 48 और 72 घंटे तक चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट यूएई की एक एनआरआई योगा टीचर मनसुखानी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था इस याचिका में ऐसे नेताओं के खिलाफ कड़े एक्शन की मांग की गई थी, जो चुनाव के दौरान जाति-धर्म के आधार पर टिप्पणियां कर रहे हैं बरहाल अभी ये शुरूआत है और आने वाले वक्त में ये भी साफ हो जाएगा कि चुनाव आयोग का चाबुक किस-किस पर चलता है। क्योंकि विवादित बयान देने वालो की लिस्ट काफी लंबी है और उसमें कई दिगग्ज नेता भी शामिल हैं लेकिन ये सुखद है कि कुछ ही सही लेकिन बदजुबानी पर कुछ लगाम तो लगी और बड़ी बात ये है कि इसका संदेश दूर तक जाएगा कि गलती करेंगे तो सजा भी मिलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here